अध्यक्ष का संदेश

अध्यक्ष -

अध्यक्ष, एनआईओएस

संक्षिप्त प्रोफाइल -

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) अपने उत्कृष्ट स्वरूप में पहुँच गया है और यह स्कूली शिक्षा क्षेत्र में मुक्त और दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) के क्षेत्र में अपने उदभव के दो दशक पूरे करने ही वाला है । संस्थान की यह यात्रा काफी सफल रही है । इसमें 2.71 मिलियन शिक्षार्थी नामांकित हैं, और एनआईओएस को विश्व सबसे बड़ा मुक्त विद्यालय माना जाता है जो राष्ट्रमंडल देशों और कुछ अन्य विकासशील और विकसित देशों में खासा लोकप्रिय है । एनआईओएस अपने अध्ययन केन्द्रों द्वारा माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (वीईटी) पाठ्यक्रम और प्रत्यायित एजेंसियों द्वारा मुक्त बेसिक शिक्षा कार्यक्रम चलाता है ।

एनआईओएस सभी वर्गों के शिक्षार्थियों के लिए पूर्व-स्नातक स्तर तक अध्ययन के पाठ्यक्रमों की व्यापक श्रंखला ही नहीं चलाता अपितु देश में मुक्त विद्यालय आंदोलन को आगे ले जाने के लिए एक नोडल संस्था के रूप में भी कार्य करता है जिससे एक सम्मिलित और शिक्षित समाज के विकास का उद्धेश्य प्राप्त किया जा सके । यह सब संस्था के संकाय और कर्मचारियों तथा अन्य हितधारकों के समर्पण और सतत सहयोग से संभव हुआ है । फिर भी, कुछ ऐसे कार्य और विषय हैं जिनका संक्षिप्त परिचय और विशेष महत्व दिये जाने की आवश्यकता है । ये निम्नलिखित हैं :-

  1. ओडीएल प्रणाली की सफलता मुख्य रूप से उसके शिक्षार्थियों की संतुष्टि पर निर्भर करती है, न केवल इस रूप में कि उन्हें प्राप्त होने वाली शैक्षिक सहायता की गुणवत्ता क्या है अपितु यह भी कि वे सीखने की प्रक्रिया के दौरान कितने सशक्त हुए हैं । एनआईओएस को अपनी शैक्षिक सहायता प्रणाली को समेकित एवं सशक्त करके इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है ।
  2. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या संरचना (एनसीएफ 2005) ने हम सभी के समक्ष, बहुत सी चुनौतियाँ विशेषत: स्कूल शिक्षा क्षेत्र में रखी हैं जिनका उद्धेश्य केवल यह देखना नहीं है कि क्या पढ़ाया जाना है अपितु यह भी सुनिश्चित करना है सीखने की प्रक्रिया प्रभावशाली हो । यह शिक्षार्थी को और अधिक स्वतन्त्रता और स्वायत्ता देने पर ज़ोर देती है । अत: शिक्षा को और अधिक शिक्षार्थी केन्द्रित बनाने के लिए एनआईओएस की पाठ्यचर्या को पुन: देखने की आवश्यकता है ।
  3. एनआईओएस को समाज के उन सुविधावंचित समूहों पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है जो विभिन्न प्रकार के सामाजिक - आर्थिक कारणों की वजह से बहुत समय से शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रखे गए हैं । हम ऐसे कार्यक्रम और लागू करने योग्य कार्रवाई योजनाएँ तैयार करने की प्रक्रिया में हैं जिनमें शिक्षा वंचितों तक शिक्षा पहुंचाने को वरीयता दी जाएगी और उन्हें प्रासंगिक और आवश्यकता आधारित गुणात्मक शिक्षा प्रदान करके उनके सामाजिक स्तर को बढ़ाया जाएगा । अनु.जा., अनु.जन.जाति, बालिकाओं और विभिन्न प्रकार से अक्षम व्यक्तियों के अतिरिक्त, एनआईओएस ने अल्पसंख्यकों की शिक्षा के कार्यक्रम की संकल्पना भी तैयार की है । अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिए कार्यक्रम पहले ही आरंभ किया गया है और यह प्रसार की प्रक्रिया में है ।
  4. हाल ही के वर्षों में, आधुनिक प्रौढ्योगिकियाँ बहुत सी भूमिकाएँ निभा रही हैं । अन्य बातों के साथ साथ, एनआईओएस द्वारा सूचना और सम्प्रेषण प्रौढ्योगिकी (आईसीटी) का व्यापक उपयोग स्कूली शिक्षा, विशेषकर माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तरों पर किया जा रहा है। शिक्षण- अधिगम और अन्य ओडीएल प्रयासों को सुविधाजनक बनाने के लिए आईसीटी के लाभों का पूरा उपयोग करने के लिए एक विशद विजन और परिप्रेक्ष्य योजना तैयार की जा रही है । हम अपने प्रयासों और सहयोग एवं समन्वयन के पब्लिक -प्राइवेट साझेदारी (पीपीपी) माध्यम का उपयोग करके दूरस्थ शिक्षार्थियों को सशक्त करने के लिए बहुत से कदम उठा रहे हैं । कुछ महत्वपूर्ण आईसीटी आधारित कार्यक्रम जिन पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है, वे हैं:
    1. ऑन-लाइन प्रवेश
    2. जब चाहो तब परीक्षा प्रणाली (ओड्स),
    3. अंत: क्रियात्मक स्वर अनुबोधन प्रणाली (आईवीआरएस) और
    4. 24×7 प्रवेश सुविधा ।
  5. कार्यकर्ताओं की सक्षमता निर्माण ओडीएल प्रणाली का एक महत्त्वपूर्ण भाग है । इस तथ्य को देखते हुए कि बहुत बड़ी संख्या में कार्मिक शैक्षिक कार्यक्रमों की योजना निर्माण, क्रियान्वयन और मॉनीटरिंग से जुड़े हैं, इसलिए स्कूली शिक्षा क्षेत्र में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है । एनआईओएस को यह सुनिश्चित करने के लिए कि सक्षमता निर्माण गतिविधियाँ¡ राज्य मुक्त विद्यालयों के अंतर्गत कार्यरत कार्यकर्ताओं सहित सभी स्तरों पर एक महत्वपूर्ण तत्व बनें, एक विशद प्रणाली तैयार करनी है । हमें मुक्त विद्यालयी शिक्षा प्रणाली को ओडीएल कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं अपितु कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग (कोल) और यूनेस्को जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्षमता निर्माण की चुनौती का सामना करने के लिए सक्रिय कारक बनाना है ।
  6. ओडीएल सहित किसी भी अनुदेशनात्मक प्रक्रिया में अनुसंधान एक महत्वपूर्ण तत्व है जो प्रणाली को केवल आंतरिक रूप से सशक्त ही नहीं करता अपितु राष्ट्रीय और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण रूप से योगदान करता है । अनुदेशनात्मक प्रक्रिया को सशक्त करने के साथ साथ शिक्षा को प्रासंगिक और शिक्षार्थियों के लिए आवश्यकता आधारित बनाने के लिए इस क्षेत्र पर काफी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है । ये प्रयास मुक्त विद्यालयी शिक्षा कार्यक्रम को एक सशक्त आधार प्रदान करने में उपयोगी सिद्ध होंगे ।
  7. एनआईओएस भारत सरकार और राज्य सरकारों के सहयोग से देश में मुक्त विद्यालयी शिक्षा आंदोलन को और अधिक सशक्त करने के लिए मुक्त विद्यालयों के एक नेटवर्क की स्थापना करके विशेषकर स्कूली स्तर पर ओडीएल प्रणाली के विकास के लिए सतत प्रयास कर रहा है ।
  8. संस्था से अपेक्षाओं और उसके द्वारा समाज के लिए किए गए वास्तविक योगदान के बीच एक मधुर संतुलन बनाए जाने की आवश्यकता है । हमारा प्रयास शिक्षार्थी को एक अच्छा मानव और समाज का एक उपयोगी सदस्य बनाना होगा । इस परिप्रेक्ष्य में रोजगार की दुनिया में प्रवेश करने के इच्छुक विशेष लक्ष्य समूहों को उपयुक्त व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (वीईटी) प्रदान करना हमारा प्रमुख उद्धेश्य है जिसे मुख्य रूप से पीपीपी माध्यम द्वारा लागू किया जाएगा । सामाजिक अपेक्षाओं की सीमाएं नहीं होतीं, फिर भी व्यक्ति को जहां तक संभव हो इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रयास करने चाहिए । एनआईओएस की ओडीएल प्रणाली को अपेक्षाओं के मानदंडों के बीच कार्य करना होगा और स्कूली शिक्षा के सार्वभौमिकीकरण के लिए राष्ट्र के प्रयासों में मुख्य रूप से योगदान देना होगा । शिक्षा की चुनौतियों के उपयुक्त उत्तर प्रदान करने के लिए आइए हाथ मिलाएँ ।

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